चौंतड़ा में स्मार्ट मीटर के विरोध में व्यापारियों का प्रदर्शन, निजीकरण का आरोप लगाकर आंदोलन की चेतावनी

चौंतड़ा में स्मार्ट मीटर के विरोध में व्यापारियों का प्रदर्शन, निजीकरण का आरोप लगाकर आंदोलन की चेतावनी

स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में चौंतड़ा के व्यापारी एकजुट, सरकार से योजना रोकने की मांग

जोगिंदरनगर में स्मार्ट मीटर विवाद गहराया, विरोध तेज करने की चेतावनी

हिमाइना न्यूज, ब्यूरो।

मंडी, 15 जुलाई। मंडी जिले के चौंतड़ा में बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में बुधवार को स्थानीय व्यापारियों और उपभोक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। जिला परिषद सदस्य कुशाल भारद्वाज के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में व्यापार मंडल चौंतड़ा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय व्यापारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निजी कंपनी के कर्मचारी और बिजली बोर्ड के कुछ अधिकारी स्मार्ट मीटर लगाने के दौरान उपभोक्ताओं को डराने-धमकाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान व्यापार मंडल चौंतड़ा के अध्यक्ष अनिल ठाकुर, उपाध्यक्ष अनिल सूद, सचिव रविंदर कुमार, त्रिलोक चौहान, डॉ. प्रभात शर्मा, सुरेंद्र राणा, पंकज सूद, लक्की, कपिल सूद, राम चंद, राज कुमार, अरुण, रणजीत, बिट्टू, रोशन लाल, गुर प्रसाद, शंभू, पंकज चौधरी, रंगीलू राम सहित अनेक व्यापारी मौजूद रहे।

प्रदर्शन के बाद आयोजित बैठक में व्यापारियों ने स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में आगामी रणनीति तैयार की तथा अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को इस आंदोलन से जोड़ने का निर्णय लिया।

 

जिला परिषद सदस्य कुशाल भारद्वाज ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर योजना बिजली वितरण के निजीकरण की दिशा में पहला कदम है। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में बिजली सब्सिडी समाप्त होने, कर्मचारियों की छंटनी, पेंशन व्यवस्था पर असर पड़ने और बिजली वितरण का कार्य निजी कंपनियों को सौंपे जाने की आशंका है।

उन्होंने दावा किया कि यदि बिजली वितरण निजी हाथों में चला गया तो उपभोक्ताओं को महंगी बिजली मिलेगी और सरकारी बिजली बोर्ड की भूमिका धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी। उनके अनुसार इससे हजारों कर्मचारियों के रोजगार और पेंशन पर भी असर पड़ सकता है।

 

कुशाल भारद्वाज ने कहा कि देशभर में करोड़ों स्मार्ट मीटर लगाए जाने की योजना के तहत बड़े कॉर्पोरेट समूहों को भी कार्य सौंपा गया है। उनका आरोप है कि एक स्मार्ट मीटर की लागत लगभग 10 हजार रुपये तक होती है, जिसकी वसूली मासिक बिजली बिलों के माध्यम से कई वर्षों में उपभोक्ताओं से की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर प्रीपेड और पोस्टपेड प्रणाली पर आधारित होंगे तथा रिचार्ज समाप्त होने पर बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो सकती है। वहीं उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में पहले से लगे इलेक्ट्रॉनिक मीटर अपेक्षाकृत काफी कम लागत वाले हैं।

 

कुशाल भारद्वाज ने राज्य सरकार से स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना मीटर बदले जाने का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर लोगों की इच्छा के विरुद्ध पुराने मीटर हटाए गए हैं, वहां पुराने मीटर पुनः लगाए जाने चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया नहीं रोकी तो पूरे जोगिंदरनगर क्षेत्र में स्मार्ट मीटर विरोधी सत्याग्रह शुरू किया जाएगा।

बैठक में वरिष्ठ व्यवसायी एवं पूर्व शिक्षक त्रिलोक चौहान, डॉ. प्रभात शर्मा, अनिल ठाकुर, अनिल सूद और रविंदर कुमार ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी के कर्मचारी तथा कुछ अधिकारी उपभोक्ताओं और व्यापारियों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं और कई स्थानों पर जबरन पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई और कथित दबाव का व्यापारी वर्ग एकजुट होकर विरोध करेगा।

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