मुख्यमंत्री सुक्खू ने पूछा, क्या भाजपा सांसद व विधायक उठाएंगे हिमाचल के अधिकारों की आवाज

मुख्यमंत्री सुक्खू ने पूछा, क्या भाजपा सांसद व विधायक उठाएंगे हिमाचल के अधिकारों की आवाज

जब तक कांग्रेस सरकार, ओपीएस नहीं होगी बंद : सुक्खू

हिमाइना न्यूज, ब्यूरो।

बिलासपुर, 5 फरवरी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज बिलासपुर जिला के झंडूता विधानसभा क्षेत्र के बरठीं में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए री-रड़ोह पुल तथा दधोग टपें गांव में पुल के निर्माण के लिए अढ़ाई करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्होंने बरठीं, गेहड़वी और झंडूता स्कूल को सीबीएसई पाठ्यक्रम पर आधारित करने की भी घोषणा की। उन्होंने तलाई में सब तहसील, मल्होट में कॉपरेटिव बैंक खोलने की घोषणा की।

पीएचसी कलोल को अपग्रेड करने की घोषणा की। उन्होंने भल्लू घाट पुल पर हुए सड़क हादसे के प्रभावित 16 परिवारों को 31-31 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके अलावा उन्होंने मरणोपरांत शौर्य चक्र विजेता बलदेव चंद के परिजनों को भी सम्मानित किया।

उन्होंने कहा कि पहली बार हिमाचल प्रदेश के निचले क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी का मुख्यमंत्री बना। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं कि कभी आम परिवार से निकल कर प्रदेश की सेवा करने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने जनता के पांच हजार करोड़ रुपये लोगों में बांटने की बजाय राजनीतिक लाभ के लिए खर्च किए।

वर्तमान सरकार से पिछली भाजपा सरकार को 50 हजार करोड़ अधिक मिला और 50 हजार करोड़ कर्ज के तौर पर लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने आय के संसाधन पैदा किए और भ्रष्टाचार के दरवाजों को बंद किया। वर्तमान सरकार ने 23 हजार करोड़ रुपए कर्ज लिया और 26 हजार करोड़ रुपए ब्याज और मूलधन वापिस किया।

सुक्खू ने कहा कि संविधान के प्रावधानों के मुताबिक 73 साल से हिमाचल प्रदेश को ग्रांट मिल रही थी लेकिन अब इसे बंद कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश में 68 प्रतिशत वन भूमि है और लोग 32 प्रतिशत भूमि पर गुजारा करते हैं। लेकिन इस बात को नजर अंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि एक फरवरी हिमाचल प्रदेश के इतिहास का काला दिन है, जब केंद्र सरकार ने हर साल मिलने वाले लगभग दस हजार करोड़ रुपये की ग्रांट बंद कर दी।

उन्होंने कहा, ‘‘आज भाजपा के सांसदों और विधायकों से पूछा जाना चाहिए, क्या पांच साल में न मिलने वाले 50 हजार करोड़ के विरुद्ध आवाज उठाएगें? इसके विरुद्ध प्रदेश की जनता को आवाज उठानी पड़ेगी क्योंकि यह लोगों के अधिकारों पर डाका है। हम यह लड़ाई जनता के सहयोग से लड़ेंगे। हिमाचल के अधिकारों के लिए हम भाजपा विधायकों के नेतृत्व में दिल्ली जाने को तैयार हैं। आज मैं मुख्यंमत्री हूं, कल कोई और होगा लेकिन हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई सर्वोपरि है।’’

उन्होंने कहा कि मछुआरों की रॉयल्टी को राज्य सरकार ने 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया है और आने वाले समय में इसे और कम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बेसहारा पशुओं को सहारा देने के लिए राज्य सरकार ने प्रति पशु सहायता 700 से बढ़ाकर 1200 रुपए किया। उन्होंने कहा कि मुझ पर ओपीएस बंद करने का दबाव है, लेकिन मैं इस दबाव के आगे नहीं झुका।

भाजपा की सरकार ने राजस्थान में आते ही सरकारी कर्मचारियों की ओपीएस को बंद करना का निर्णय ले लिया है। लेकिन जब तक हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, तब तक ओपीएस बंद नहीं होगी। हालाँकि केंद्र सरकार ने ओपीएस लागू करने पर 1600 करोड़ रुपए की मदद बंद कर दी। हम युवाओं को रोजगार दे रहे हैं लेकिन केन्द्र की भाजपा सरकार ने प्रदेश को अग्निवीर दिए। उन्होंने कहा कि दस वर्ष में केंद्र सरकार ने प्रदेश के सैनिकों को अग्निवीर बनाकर छोड़ दिया। क्या किसी न सोचा कि चार साल बाद युवा क्या करेंगे?

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