‘युवा बचाओ व पर्यावरणीय चुनौतियों के संदर्भ में वैज्ञानिक चेतना’ विषय पर कार्यशाला

युवा बचाओ व पर्यावरणीय चुनौतियों के संदर्भ में वैज्ञानिक चेतना’ विषय पर कार्यशाला

हिमाइना न्यूज ब्यूरो

मंडी। 20 अगस्त। हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति एवं तकनीकी विकास समिति की ओर आर बुधवार को गोबिंद सिंह वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, मंडी के सभागार में ‘पर्यावरणीय चुनौतियों के संदर्भ में वैज्ञानिक चेतना’ विषय पर कार्यशाला एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति के सचिव गजेंद्र शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के विकास में युवाओं की भूमिका निर्णायक है क्योंकि यही वर्ग सबसे ऊर्जा-सम्पन्न और उत्पादक अवस्था में होता है। लेकिन दिशा के अभाव, नशे की प्रवृत्ति, गलत संगति और लक्ष्यहीनता के कारण यही अवस्था सबसे संवेदनशील भी बन जाती है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशे और गलत संगति से दूर रहकर समाज व राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक योगदान दें। उन्होंने कहा – “युवा शक्ति दिशा पाए तो विकास का इंजन बनती है; दिशा खो दे तो वही शक्ति विनाशकारी हो जाती है। आज के युवा को हर प्रकार के नशे से बचना चाहिए।

इस अवसर पर अंधश्रद्धा निर्मूलन आंदोलन के अग्रदूत डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय वैज्ञानिक चेतना दिवस भी मनाया गया। तकनीकी विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. विजय विशाल ने डॉ. दाभोलकर के जीवन और योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने धार्मिक कुरीतियों, पाखण्डों और अंधविश्वासों का विरोध कर समाज में विवेक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने हेतु अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। 20 अगस्त 2013 को उनकी शहादत के बाद से अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क इस दिन को राष्ट्रीय वैज्ञानिक चेतना दिवस के रूप में मना रहा है।

तकनीकी विकास समिति के सचिव एवं अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क के राष्ट्रीय पदाधिकारी जोगिंद्र वालिया ने कहा कि इस वर्ष संगठन ने पुरे देश में “युवा बचाओ एवं वैज्ञानिक चेतना को पर्यावरणीय चुनौतियों से जोड़कर देखने” का निर्णय लिया है।

हिमालयी राज्यों, विशेषकर हिमाचल प्रदेश में आज सबसे बड़ी चुनौती बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन की है। बढ़ते तापमान और अनियमित वर्षा से आम लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन का सीधा असर कृषि व बागवानी पर पड़ेगा, जिससे फसल चक्र बिगड़ेगा और पारम्परिक फसलें नष्ट हो सकती हैं।

विद्यालय की प्रधानाचार्या अंजू देवी ने अपने वक्तव्य में शिक्षा, शिक्षकों और छात्रों की वैज्ञानिक चेतना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। समिति की राज्य सदस्य रीना ठाकुर ने विद्यालय प्रबंधन समिति और प्रधानाचार्या का धन्यवाद किया तथा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी का आभार प्रकट किया।

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