प्रदेश के इतिहास में पहली बार सभी पंचायतों में नियुक्त होंगे प्रशासक : जयराम ठाकुर
30 जनवरी तक वोटर लिस्ट पब्लिकेशन की डेड लाइन पूरी काम अधूरा
सरकार झूठ बोलकर महात्मा गांधी के पंचायती राज और ग्राम स्वराज के सपने का गला घोंटा
प्रदेश में फिल्मी स्टाइल में चल रही हैं गोलियां, पुलिस माफिया को संरक्षण देने में व्यस्त
हिमाइना न्यूज, ब्यूरो।
शिमला, 31 जनवरी। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार लगभग 3600 पंचायतों में 1 फरवरी से प्रशासक नियुक्त किए जा रहे हैं, जिससे 30 हजार से अधिक निर्वाचित जनप्रतिनिधि प्रभावहीन हो जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पंचायत चुनावों में जानबूझकर देरी की और महात्मा गांधी के पंचायती राज व ग्राम स्वराज के सपने को कुचल दिया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद 30 जनवरी तक मतदाता सूची प्रकाशित नहीं हो सकी, जो सरकार की लापरवाही और हठधर्मिता को दर्शाता है। साथ ही उन्होंने प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि सरकार माफिया तत्वों को संरक्षण दे रही है, जिसके कारण दिनदहाड़े गोलियां चलने जैसी घटनाएं आम हो गई हैं।
यह इस प्रकार के न सिर्फ दोहरे मानदंडों को दर्शाता है बल्कि जनहित और जन सरोकारों से दूर होती सुक्खू सरकार की हकीकत भी देश के सामने रखता है। भाजपा मुख्यमंत्री का यह रवैया देखकर बीते 6 माह से कह रही है कि सरकार पंचायत चुनाव में देरी कर रही है लेकिन मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्री और पूरी सरकार के लोग हमेशा ही चुनाव को समय पर करवाने का आश्वासन देते रहे।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरीके से पाताल में चली गई है। प्रदेश में आतंकी आकर थाने में बॉम्ब धमाका कर रहे हैं। लेकिन पुलिस अन्य कामों में व्यस्त है। आज बद्दी में एसपी आवास से पांच किलोमीटर दूर दिन दहाड़े गोलियां चली हैं। यह कोई पहली बार नहीं है। यह हर दिन का धंधा हो गया है। कानून व्यवस्था, लोगों की सुरक्षा जैसी कोई चीज प्रदेश में रही ही नहीं। जिसका जब मन आए, जहां मन आए दिनदहाड़े गोलियां बरसाने से हिचक नहीं रहा है। इसका एकमात्र कारण है कि सरकार माफिया पर कार्रवाई करने की बजाय उसका फन कुचलने की बजाय उसे संरक्षण प्रदान कर रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमने शुरुआत में ही सरकार को आगाह किया था कि माफिया को संरक्षण देने से सरकार कलंकित ही होगी। माफिया को संरक्षण देना प्रदेश की संस्कृति नहीं थी। इसलिए सरकार ऐसे माफिया तत्वों को अपने हितों को साधने का साधन और अपना हथियार न बनाए। आज पुलिस प्रशासन माफिया और अराजक तत्वों को संरक्षण देने में व्यस्त है। शराब माफिया, खनन माफिया, वन माफिया, स्क्रैप माफिया, इंडस्ट्री माफिया, नशा माफिया न जाने कितने माफिया आज सरकार की संरक्षण में न सिर्फ पनप रहे हैं बल्कि फल फूल रहे हैं।