हिमाचल में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम, मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन
हिमाइना न्यूज ब्यूरो।
शिमला। श्री कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को, विशेषकर मध्यरात्रि में, मनाया जाता है क्योंकि पौराणिक कथा के अनुसार कृष्ण का जन्म रात्रि के समय हुआ था। इस दिन रात भर मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की जारी है। रात्रि जागरण कर कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाया गया। हिमाचल प्रदेश सहित शिमला के राधा कृष्ण मंदिर में दिन से ही विशेष पूजा अर्चना की गई। रात्रि 12 बजते ही भक्तों के पटाखों के साथ कान्हा का जन्मदिवस मनाया।
क्या है पौराणिक महत्व
मथुरा के राजा कंस ने अपनी बहन देवकी और उनके पति वासुदेव को कारागार में डाल दिया क्योंकि ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा।
जब आठवें पुत्र (कृष्ण) का जन्म हुआ, तो चमत्कारिक रूप से जेल के द्वार खुल गए और वासुदेव शिशु कृष्ण को यमुना नदी पार करके गोकुल में नंद और यशोदा के घर ले आए।
ये है पूजा विधि
उपवास और व्रत – भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं और रात 12 बजे कृष्ण जन्म के बाद फलाहार या प्रसाद ग्रहण करते हैं। झूला सजाना – मंदिरों और घरों में झूलों पर बालक कृष्ण की मूर्ति को सजाया जाता है। भजन-कीर्तन – रात्रि जागरण कर भक्त भजन, नृत्य और कीर्तन करते हैं। अभिषेक – दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से कृष्ण का अभिषेक किया जाता है।
यहां होते हैं प्रमुख आयोजन
मथुरा और वृंदावन: जन्मस्थल और लीलास्थल होने के कारण यहां भव्य उत्सव होते हैं।
दही-हांडी: महाराष्ट्र, गुजरात आदि में अगले दिन “गोविंदा” मंडलियां दही-हांडी फोड़ कर कृष्ण की माखन चोरी की लीला का स्मरण करती हैं।