सिस्सू झील में GLOF अर्ली वार्निंग सिस्टम का निरीक्षण, एनडीएमए ने परखी आपदा पूर्व चेतावनी तकनीक

सिस्सू झील में GLOF अर्ली वार्निंग सिस्टम का निरीक्षण, एनडीएमए ने परखी आपदा पूर्व चेतावनी तकनीक

लाहौल-स्पीति में संभावित ग्लेशियल झील खतरे पर सतर्कता, एनडीएमए टीम ने किया साइट विजिट और समीक्षा बैठक

आपदा से पहले चेतावनी की तैयारी: सिस्सू झील में आधुनिक EWS सिस्टम पर एनडीएमए की नजर, मनाली में अहम बैठक आयोजित

हिमाइना न्यूज, ब्यूरो।

कुल्लू, 16 अप्रैल। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल और एनडीएमए के सचिव मनीष भारद्वाज ने 15 से 17 अप्रैल तक लाहौल-स्पीति जिला की सिस्सू झील का निरीक्षण किया।

डॉ असवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य वहां प्रस्तावित ‘प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट’ के तौर पर स्थापित होने वाले ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) का निरीक्षण करना और इसके तकनीकी पहलुओं को समझना था।

उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में ग्लेशियर की झीलों के फटने से अचानक आने वाली बाढ़ (GLOF) एक बड़ी चुनौती है। सिस्सू झील में स्थापित होने वाली यह आधुनिक प्रणाली आपदा आने से पहले ही चेतावनी जारी करने में सक्षम है। एनडीएमए के अधिकारी इस प्रणाली के सफल प्रदर्शन और ज्ञान-साझाकरण सत्र के माध्यम से इसकी प्रभावशीलता का आकलन कर रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्तर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बेहतर कार्य कर रही है। राज्य तथा केंद्र सरकार जनता की सुरक्षा के सेवा के लिए इस क्षेत्र में सदैव तत्पर है इन प्रयासों से आम जनता का फ़ायदा होगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए इस प्रयास का उद्देश्य बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकना है।

व्यास नदी के किनारे पर बाढ़ के कारण हो रहे नुकसान को रोकने की योजना पर उन्होंने कहा कि हिमालय, 1 मिमी से 17 मिमी तक ग्रोथ हो रही है इसके साथ ही क्लाइमेट चेंज जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि आज के युग में हम वैज्ञानिक तरक्की भी प्रकृति के नियमों विपरीत कर रहे हैं जिसका दूरगामी प्रभाव पड़ रहा है।

इसके लिए विभागीय कार्यों एवं प्रयासों के साथ जनभागीदारी, वृक्षारोपण आदि के कार्य भी आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार, मीडिया, सिविल सोसायटी के प्रयास ही इसमें प्रत्याशित सफलता प्रदान कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि इस दौरे के माध्यम से आपदा प्रबंधन की दिशा में नई तकनीकों को साझा किया जा रहा है। बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे इस महत्वपूर्ण प्रणाली के सफल कार्यान्वयन और तकनीकी टीम के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखें।

उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए प्रदेश सरकार ने बढ़िया योजना बनाई है। ये सभी इंजीनियरिंग की विशिष्टता आधारित योजनाएं हैं इसलिए विशेषज्ञ एजेंसियों की सहायता तथा ज्ञान के सहारे ही कार्यान्वित होती हैं। आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 के बाद 20 सालों में इस पर तेजी से कार्य हुआ है।

बैठक में जानकारी देते हुए अतिरिक्त सचिव राजस्व एवं डीएमसी निशांत ठाकुर ने इसके अंतर्गत किए जा रहे कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की।

इस अवसर पर मुख्य अभियंता जल शक्ति विभाग मंडी जोन द्वारा एक विस्तृत पीपीटी की प्रस्तुति दी गई।

बैठक में उपायुक्त लाहौल स्पीति किरण भड़ाना, उपमंडल अधिकारी मनाली गुंजीत सिंह चीमा, जल शक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता विनोद कुमार, अधिशाषी अभियंता कुल्लू अमित ठाकुर, वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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