अधिकारियों की आपसी लड़ाई में सीएम बेबस, दे रहे हास्यास्पद तर्क : जयराम ठाकुर

अधिकारियों की आपसी लड़ाई में सीएम बेबस, दे रहे हास्यास्पद तर्क : जयराम ठाकुर

 सब कुछ जानते हुए अनजान बनने का नाटक कर रहे हैं मुख्यमंत्री सुक्खू

 

व्यवस्था परिवर्तन में सहारा पेंशन देने की बजाय मृत घोषित कर पेंशन रोकी जा रही है

हिमाइना न्यूज, ब्यूरो।

शिमला, 2 अप्रैल। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री का बजट तथ्य, दूरदर्शिता और विकास से कोसों दूर है।

पहली बार हिमाचल प्रदेश में गत वर्ष की अपेक्षा बजट में कमी आई है। सरकार द्वारा लगातार अपनी नाकामी का दोष केंद्र को दिया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल को भाजपा सरकार के मुकाबले ज्यादा धनराशि दी जा रही है। चिट्टा, शराब, खनन, वन माफिया तांडव मचा रहा है। पंचायत चुनाव में मुख्यमंत्री लगातार झूठ बोल की रहे है। साजिशें कर रहे हैं। वे विधानसभा सत्र के समापन पर पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक उनकी कोशिश नाकाम हो गई, जिसके बाद चुनाव करवाना पड़ रहा है। लेकिन सरकार अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है। शूलिनी यूनिवर्सिटी में चार दिन से प्रदर्शन हो रहा है। एक छात्र ने यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप लगाते हुए आत्महत्या की है और सरकार कार्रवाई करना तो दूर जानकारी लेने और कुछ बोलने को तैयार नहीं है। शूलिनी यूनिवर्सिटी में जो हुआ दुर्भाग्यपूर्ण है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि आज प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी में जो हालात बने हैं वह बहुत चिंताजनक, गंभीर और शर्मनाक है। सीएम सब जानने के बाद कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है। हमने विधान सभा में मुद्दे को कई बार उठाया, लेकिन सीएम चुप हैं। संदिग्ध अधिकारियों को प्राइम पोस्टिंग दी गई हैं। उनकी हज़ार शिकायते हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई करना तो दूर मुख्यमंत्री कुछ कहने की स्थिति में नहीं हो पा रहे हैं। जबकि अधिकारी एक दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं।

मुख्यमंत्री उन पर कार्रवाई नहीं कर सकते क्योंकि वह कॉम्प्रोमाइज हैं। संदिग्ध और दागी अधिकारियों को हटा वही व्यक्ति सकता है जो ख़ुद ठीक होगा। हमारी सरकार के जिन अधिकारियों पर जरा भी उँगली उठी हमने उन्हें हटाया और उन्ही अधिकारियों को आज मुख्यमंत्री सर माथे पर बैठाकर चल रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री आज किसी के ऊपर कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।

पत्रकारों द्वारा अधिकारियों पर पूछे सवाल में उनके जवाब और तर्क शर्मनाक, हास्यास्पद तथा बचकाना हैं। उनकी खामोशी बता रही है कि सभी अधिकारियों पर मुख्यमंत्री का सच में संरक्षण है। उनकी विवशता पूरा प्रदेश देख रहा है।

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