मंडी : जिला में किसानों को बेदखली के नोटिस देने पर किसान सभा मुखर
महासचिव राकेश सिंघा ने उपायुक्त मंडी को सौंपा ज्ञापन
पूछा, सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी कड़ाई से क्यों नहीं हो रहा नियमों का पालन
हिमाइना न्यूज, ब्यूरो।
मंडी, 8 जनवरी। हिमाचल किसान सभा की मंडी जिला कमेटी ने जमीन व मकानों से बेदखली पर उच्च न्यायालय के आदेश पर लगी सुप्रीम कोर्ट की रोक को लागू करने के बजाए जिला में किसानों को बेदखली के नोटिस देने की कड़े शब्दों में निंदा की है।
इस संबंध में वीरवार को मंडी में किसानों का जिला स्तरीय अधिवेशन आयोजित करने के बाद हिमाचल किसान सभा के महासचिव राकेश सिंघा के नेतृत्व में उपायुक्त मंडी से मिला तथा उन्हें ज्ञापन भी दिया।

इस अवसर पर राकेश सिंघा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश भू राजस्व क़ानून की धारा 163A को निरस्त करने बारे तथा कब्जों को हटाने बारे प्रदेश उच्च न्यायालय का जो फैसला 5 अगस्त 2025 को आया था, उस पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय के फैसले पर स्थगनादेश देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश भी जारी किए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को भी हिदायत दी है कि प्रदेश सरकार भूमि नियमितीकरण को लेकर कोई नीति बनाकर सक्षम प्राधिकारी को भेजे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की दोनों बड़ी पार्टियां कांग्रेस व भाजपा किसानों को लंबे समय से ठग रही हैं तथा उनके पक्ष में खड़े होने होने के बजाय बेदखली को उचित ठहराती हैं।
उन्होंने कहा कि सन 2002 में भाजपा ने किसानों को ठग कर जमीन के नियमितीकरण के लिए हलफनामे लिए तथा उन्हें फंसाया। उन्होंने कहा कि उपायुक्त को दिए ज्ञापन में किसान सभा की जिला कमेटी की तरफ से जिला अध्यक्ष कुशाल भारद्वाज व जिला सचिव रामजी दास ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश प्रदेश भर के किसानों और बागवानों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने के बावजूद जिला मंडी में जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, वन विभाग आदि द्वारा किसानों को बेदखली के नोटिस देना पूरी तरह से सर्वोच्च न्यायालय के स्थगनादेश की उल्लंघना है।
इसलिए हिमाचल किसान सभा की मंडी जिला कमेटी आप से मांग करती है कि सर्वोच्च न्यायालय के स्थाग्नादेशों का पूरी तरह से पालन करते हुए किसी भी प्रकार से बेदखली के नोटिस देने व बेदखली करने की पूरी प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रोका जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो किसान सभा सम्बंधित अधिकारियों के खिलाफ संघर्ष के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया अपनाने के लिए भी बाध्य होगी। किसान सभा आप से आग्रह करती है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित किया जाए।
वहीं अधिवेशन में तय किया गया कि हर जगह किसानों को संगठित किया जाएगा तथा नियमितीकरण के लिए आंदोलन तेज किया जाएगा। प्रदेश सरकार से भी मांग की गई कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू किया जाए तथा नियमितीकरण को लेकर तुरंत नीति बनाई जाए।
अधिवेशन में कुशाल भारद्वाज, रामजी दास, जोगिंदर वालिया, बिहारी लाल, महेंद्र राणा, चंद्र ठाकुर, रविंदर कुमार, केहर सिंह, मस्त राम, प्रेम चौधरी, कृष्ण कुमार, चमन लाल, प्रकाश चंद, संजय कुमार, प्रभदयाल, मिल्खी राम, यदुनंदन, बीरबल राम, सुंदर लाल, अमर सिंह सहित कही प्रभावित किसान भी शामिल हुए। इस अवसर पर सीटू जिला अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे।